Sunday, September 12, 2010

माँ

माँ
तुम कितनी भोली हो,
संतान को जन्म देती हो
पालती हो पोषती हो,
खुद गीले में सोकर उसे
सूखे में सुलाती हो,
जब बड़ा होकर वह
घर से निकालता है,
तब कहती हो अपना ही तो हैI
निशांत ५/१०/८०

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